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नवाचार : एक व्यापक दृष्टिकोण


परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है | जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समय के साथ कुछ न कुछ बदलाव होते रहते हैं,  यही बदलाव समाज और  इंसान के जीवंत होने का प्रमाण होता है |  समाज में बदलाव के साथ ही शिक्षा का के स्वरूप में भी परिवर्तन होता रहता है जो स्वभाविक है |  इन परिवर्तनों को यदि लम्बे समय तक प्रासंगिक रखना है तो हमें उसमे निरंतर रचनात्मकता को बनाये रखनी होगी, यही रचनात्मकता ही नवाचार कहलाती है |

नवाचार अंग्रेजी के  Innovation  शब्द से बना है जिसका अर्थ है अविष्कार | नवाचार दो शब्दों से मिलकर बना है  नव + आचार | नव का अर्थ है नया और आचार का अर्थ है आचरण या व्यवहार | इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी कार्य को करने के लिए हम जो भी नयी तकनीक अपनाते हैं,  वही नवाचार है |

वस्तुतः नवाचार एक ऐसा विचार है जो सदियों से चली आ रही परंपरा को प्रासंगिक बनाये रखने के लिए उसमें कुछ नयी विधियों, कौशल व ऊर्जा का उपयोग किया जाता है | यह प्रचलित से भिन्न, उपयोगी और नवीन होता है यही नवाचार की मूल खासियत है |


वैश्वीकरण के इस दौर में जब सारा विश्व एक गांव में समाने की कोशिश कर रहा है तो ऐसे में हर व्यक्ति को अपने अस्तित्व को बचाये रखने हेतु अपने आप को समय के साथ ढालना पड़ता है, इस अवस्था में नवाचार की हमारे जीवन में भूमिका और भी बढ़ जाती है | नवाचार शब्द अपने आप नया है मगर इसकी अवधारणा बहुत पुरानी है |
हम ऐसा भी कह सकते हैं कि जब से मनुष्य या कोई भी जीव अपना जीवन जीना शुरू करता है उसी दिन से अपने विकास के लिए नित नए-नए प्रयोग करना शुरू कर देता है  और जाने-अनजाने में ही नवाचार करने लगता है |

नवाचार को हम मनोविज्ञान के नजरिये से देखने की कोशिश करें तो हम पाएंगे कि गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिक 'कोहलर' ने इसे 'सूझ का सिद्धांत' कह कर संबोधित किया जिसके बारे में उन्होने निष्कर्ष 'सुल्तान' नामक वनमानुष पर प्रयोग करके निकाला था|

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नवाचार शब्द अपने आप में व्यापक विषय समेटे हुए है और इसके बारे में चर्चा किसी एक लेख के माध्यम से कतई नहीं की जा सकती,  पर इतना जरूर कह सकते हैं कि नवाचार हमारी कार्यप्रणाली को जीवंत बनाये रखने के लिये अति आवश्यक है |



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