आश्रम व्यवस्था : भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग आश्रम व्यवस्था :- जिस प्रकार वर्ण व्यवस्था भारतीय संस्कृति का प्रमुख अंग है उसी प्रकार आश्रम व्यवस्था भी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है | भारतीय मनीषियों के अनुसार मनुष्य जीवन के चार महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं -धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष | धर्म से हमारा तात्पर्य इहलोक व परलोक सुधारने के लिए मनुष्य द्वारा किया गये नैतिक कर्म से है | अर्थ से तात्पर्य अपना जीवन-यापन के लिए या फिर जरूरतों को पूरा करने के लिए किए गए उद्यम से है | काम से तात्पर्य अपनी वंश परंपरा को चलाने के गृहस्थ जीवन को अपनाना है और मोक्ष से तात्पर्य आत्मा के निरंतर चलने वाले इस अंतहीन चक्र से छुटकारा पाकर परम तत्व में विलीन हो जाना | आश्रम व्यवस्था आश्रम व्यवस्था की आवश्यकता :- यह सब इतना आसान नहीं है जितना हम सब समझते हैं | इसके लिए निश्चित दिशा में कठोर श्रम की आवश्यकता थी | एक निश्चित दिशा या मार्गदर्शन देने के लिए आश्रम व्यवस्था अपनाया गया था | आश्रम व्यवस्था चार चरणों में विभाजित थी | और प्रत्येक चरण का ...
कुछ नया, कुछ रचनात्मक और नयी पीढ़ी की सोच के साथ तादात्म्य स्थापित करने के उद्देश्य के साथ मन में यह ढृढ़ विश्वास लिए कि अपने विचारों से यदि मैं किसी एक के जीवन को बदल सकने में सक्षम होता हूँ तो मैं अपने आप को कृतकृत्य समझूंगा...