Skip to main content

contect me

Email:  nvachar09@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog

वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार

वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार जिस प्रकार किसी शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए उसे कार्य के आधार पर कई विभागों में बांटा जाता है ठीक उसी प्रकार भारतीय संस्कृति में समाज को बेहतर रूप से चलाने के लिए समाज को कार्य के आधार पर जिस रूप में विभाजित किया गया उसी रूप को वर्ण व्यवस्था के नाम से जाना जाता है | वर्ण व्यवस्था भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार है   वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार वर्ण व्यवस्था का स्वरूप :- प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था का स्वरूप जन्म के आधार पर न होकर कार्य, योग्यता, श्रम तथा प्रवृति के आधार पर था | कार्य, श्रम, योग्यता और प्रवृत्ति के आधार पर समाज की जो व्यवस्था बनायी गयी थी वह चार प्रकार की है | 1~ ब्राह्मण 2~क्षत्रिय 3~ वैश्य 4~ सूद्र प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था :- अपनी योग्यता के अनुरूप मनुष्य जो भी काम करते थे, वही उनकी सामाजिक पहचान बन जाती थी और यही सामाजिक पहचान उनकी वर्ण व्यवस्था का आधार था | प्राचीन काल में एक ही परिवार के व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार अलग अलग वर्ण के हो सकते थे ...

आत्मनिर्भर कैसे बने

आत्मनिर्भर कैसे बने :- हम सभी लोग बचपन से ही सुनते आए हैं कि आत्मनिर्भर बनो, अपने पैरों पर खड़े हो आदि | लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर आत्मनिर्भर बला क्या है और आत्मनिर्भर कैसे बना जाता है ? नहीं ना |  चलिए आज हम आप सभी को बताते हैं कि आत्मनिर्भर होना किसे कहते हैं और आत्म निर्भर कैसे बना जाए | आत्मनिर्भर व्यक्ति में कौन कौन से गुण होते हैं.  | आत्मनिर्भर कैसे बने आत्मनिर्भर दो शब्दों से मिलकर बना है आत्म व निर्भर | आत्म का अर्थ होता है खुद या स्वयं और निर्भर का अर्थ होता है आश्रित होना | इस प्रकार आत्मनिर्भर का अर्थ हुआ खुद पर निर्भर होना | अर्थात किसी  भी काम के लिए , किसी और पर आश्रित ना होना ही आत्मनिर्भर कहलाता है |स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर का दूसरा नाम है | आत्म निर्भर बनने के तरीके :- आत्म निर्भर बनने के बहुत से तरीके हैं किन्तु हम यहां उन्ही तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं | ये तरीके निम्नवत् हैं - 1-सेल्फ एक्टिविटी :- कोई भी काम खुद से करना ही सेल्फ एक्टिविटी कहलाता है | किसी भी व्यक्ति के लिए सेल्फ...

मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव : फायदा या नुकसान

 मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव  : फायदा या नुकसान कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती जी हां कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती | और अगर मिल रही है तो उसकी कीमत बड़ी महंगी होती है | कभी-कभी तो इसकी कीमत अपनी स्वतंत्रता देकर चुकानी पड़ती है | अगर आप भी किसी भी प्रकार की मुफ्त की चीजों के आदी हो गए हैं तो सावधान हो जाइए.. क्यों कि इसका प्रभाव बहुत भयानक है |  जो इंसान मुफ्त में कोई वस्तु लेता है तो वह देने वाले का एहसानमंद हो जाता है और एहसान के तले दबा व्यक्ति कभी भी निष्पक्ष व्यवहार नहीं कर सकता फिर चाहें देने वाला कितना ही अन्याय क्यों न करे | आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यह जानेंगें कि आखिर मुफ्त में मिली वस्तु हमारे अमूल्य जीवन पर क्या प्रभाव डाल रही है और इसके फायदे तथा नुकसान क्या हैं. ? फायदा मुफ्त में मिलने वाली वस्तु को तमाम अध्ययन और इतिहास खंगालने तथा व्यवहारिक अनुभव के आधार पर फायदे और नुकसान के आधार पर देखें तो इसका फायदा बहुत कम है या फिर यूं कहें कि न के बराबर है लेकिन नुकसान बहुत है | फायदा देखने पर सिर्फ एक ही चीज समझ में आती है कि बिना मेहनत किए हमारी उस ...