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उद्देश्य

उद्देश्य   आप सभी का   Nvachar 'नवाचार'  ब्लॉग में स्वागत है | साथियों आप इस ब्लॉग पर आयें हैं तो संभवतः इसका यही मतलब है कि आप भारतीय संस्कृति और दर्शन से गहरे स्तर तक जुड़े हैं | आप भारतीय परंपरा, रीति-रिवाज, रहन-सहन और सबसे अहम भारतीयता को संपूर्णता से जानना व समझना चाहते हैं मगर आपको इस मामले में आधी-अधूरी जानकारी से ही संतोष करना पड़ता है | इसके कई कारण हो सकते हैं.. 1-  समयाभाव :-   तेजी से बदलते दुनिया में हर व्यक्ति के पास समय का कम होना कोई बड़ी बात नहीं है | हर इंसान अपनी रोजी रोटी की फिक्र में ही अपना सारा समय खफा देता है जिससे उसे अपनी संस्कृति,  सभ्यता व दर्शन के बारे में पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता है | 2- सही जानकारी का न मिल पाना :- आज इंटरनेट के दौर में कॉपी- पेस्ट करके बिना सच्चाई जाने खबरों को इधर-उधर बहुत से लोग फैलाते हैं | इससे पाठको को न तो पूरी जानकारी ही मिल पाती है और न ही सही | वह आधी-अधूरी जानकारी को ही पूरा सच मानकर आगे बढ़ता है | 3- किताबों का भारी-भरकम होना :-   आज तक भारतीय संस्कृति को व्याख्यायित करने वाले जितने ...

मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव : फायदा या नुकसान

 मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव  : फायदा या नुकसान कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती जी हां कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती | और अगर मिल रही है तो उसकी कीमत बड़ी महंगी होती है | कभी-कभी तो इसकी कीमत अपनी स्वतंत्रता देकर चुकानी पड़ती है | अगर आप भी किसी भी प्रकार की मुफ्त की चीजों के आदी हो गए हैं तो सावधान हो जाइए.. क्यों कि इसका प्रभाव बहुत भयानक है |  जो इंसान मुफ्त में कोई वस्तु लेता है तो वह देने वाले का एहसानमंद हो जाता है और एहसान के तले दबा व्यक्ति कभी भी निष्पक्ष व्यवहार नहीं कर सकता फिर चाहें देने वाला कितना ही अन्याय क्यों न करे | आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यह जानेंगें कि आखिर मुफ्त में मिली वस्तु हमारे अमूल्य जीवन पर क्या प्रभाव डाल रही है और इसके फायदे तथा नुकसान क्या हैं. ? फायदा मुफ्त में मिलने वाली वस्तु को तमाम अध्ययन और इतिहास खंगालने तथा व्यवहारिक अनुभव के आधार पर फायदे और नुकसान के आधार पर देखें तो इसका फायदा बहुत कम है या फिर यूं कहें कि न के बराबर है लेकिन नुकसान बहुत है | फायदा देखने पर सिर्फ एक ही चीज समझ में आती है कि बिना मेहनत किए हमारी उस ...

जापानियों की सफलता का रहस्य

  जापानियों की सफलता का रहस्य  बीसवीं शताब्दी के मध्यावधि में परमाणु हमले से जिस जापान की रीढ़ पूरी तरह से टूट गयी थी, उसी जापान ने इतने कम समय में न सिर्फ खुद को मजबूत बनाया अपितु वह उगते हुए सूरज का देश भी बना | इतनी तरक्की और सफलता उन्हें उनके कुछ खास गुणों की वजह से मिली | आज सफलता के रहस्य में हम जापानियों के इन्हीं खास गुणों के बारे में जानेंगें | 1~ बेहद मेहनती :- 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले से जापान पूरी तरह से टूट गया था लेकिन बहुत कम समय में ही अपने मेहनत और लगन की बदौलत फिर से उगते हुए सूरज का देश बना | दरअसल जापान का हर व्यक्ति कर्म को पूरी निष्ठा से करने में विश्वास रखता है | यही वजह है कि जापान आज इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है | 2~ ईमानदारी :- जब किसी व्यक्ति के चरित्र को परखना होता है तो सबसे पहले उसकी ईमानदारी परखी जाती है, और अगर किसी देश का एक व्यक्ति,  दो व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा का पूरा देश ही ईमानदारी की सच्ची मिशाल हो तो फिर उस देश को श्रेष्ठ होने से भला कौन रोक सकता है | जी हां जापान ऐसा ही एक देश है जहाँ का ह...

आश्रम व्यवस्था : भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग

 आश्रम व्यवस्था : भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग आश्रम व्यवस्था :-  जिस प्रकार वर्ण व्यवस्था भारतीय संस्कृति का प्रमुख अंग है उसी प्रकार आश्रम व्यवस्था भी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है | भारतीय मनीषियों के अनुसार मनुष्य जीवन के  चार महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं -धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष |  धर्म से हमारा तात्पर्य इहलोक व परलोक सुधारने के लिए मनुष्य द्वारा किया गये नैतिक कर्म से है | अर्थ से तात्पर्य अपना जीवन-यापन के लिए या फिर जरूरतों को पूरा करने के लिए किए गए उद्यम से है | काम से तात्पर्य अपनी वंश परंपरा को चलाने के गृहस्थ जीवन को अपनाना है और  मोक्ष से तात्पर्य आत्मा के निरंतर चलने वाले इस अंतहीन चक्र से छुटकारा पाकर परम तत्व में विलीन हो जाना | आश्रम व्यवस्था आश्रम व्यवस्था की आवश्यकता :-  यह सब इतना आसान नहीं है जितना हम सब समझते हैं | इसके लिए निश्चित दिशा में कठोर श्रम की आवश्यकता थी | एक निश्चित दिशा या मार्गदर्शन देने के लिए आश्रम व्यवस्था अपनाया गया था | आश्रम व्यवस्था चार चरणों में विभाजित थी | और प्रत्येक चरण का ...

आत्मनिर्भर कैसे बने

आत्मनिर्भर कैसे बने :- हम सभी लोग बचपन से ही सुनते आए हैं कि आत्मनिर्भर बनो, अपने पैरों पर खड़े हो आदि | लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर आत्मनिर्भर बला क्या है और आत्मनिर्भर कैसे बना जाता है ? नहीं ना |  चलिए आज हम आप सभी को बताते हैं कि आत्मनिर्भर होना किसे कहते हैं और आत्म निर्भर कैसे बना जाए | आत्मनिर्भर व्यक्ति में कौन कौन से गुण होते हैं.  | आत्मनिर्भर कैसे बने आत्मनिर्भर दो शब्दों से मिलकर बना है आत्म व निर्भर | आत्म का अर्थ होता है खुद या स्वयं और निर्भर का अर्थ होता है आश्रित होना | इस प्रकार आत्मनिर्भर का अर्थ हुआ खुद पर निर्भर होना | अर्थात किसी  भी काम के लिए , किसी और पर आश्रित ना होना ही आत्मनिर्भर कहलाता है |स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर का दूसरा नाम है | आत्म निर्भर बनने के तरीके :- आत्म निर्भर बनने के बहुत से तरीके हैं किन्तु हम यहां उन्ही तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं | ये तरीके निम्नवत् हैं - 1-सेल्फ एक्टिविटी :- कोई भी काम खुद से करना ही सेल्फ एक्टिविटी कहलाता है | किसी भी व्यक्ति के लिए सेल्फ...

वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार

वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार जिस प्रकार किसी शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए उसे कार्य के आधार पर कई विभागों में बांटा जाता है ठीक उसी प्रकार भारतीय संस्कृति में समाज को बेहतर रूप से चलाने के लिए समाज को कार्य के आधार पर जिस रूप में विभाजित किया गया उसी रूप को वर्ण व्यवस्था के नाम से जाना जाता है | वर्ण व्यवस्था भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार है   वर्णव्यवस्था : भारतीय संस्कृति का सामाजिक आधार वर्ण व्यवस्था का स्वरूप :- प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था का स्वरूप जन्म के आधार पर न होकर कार्य, योग्यता, श्रम तथा प्रवृति के आधार पर था | कार्य, श्रम, योग्यता और प्रवृत्ति के आधार पर समाज की जो व्यवस्था बनायी गयी थी वह चार प्रकार की है | 1~ ब्राह्मण 2~क्षत्रिय 3~ वैश्य 4~ सूद्र प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था :- अपनी योग्यता के अनुरूप मनुष्य जो भी काम करते थे, वही उनकी सामाजिक पहचान बन जाती थी और यही सामाजिक पहचान उनकी वर्ण व्यवस्था का आधार था | प्राचीन काल में एक ही परिवार के व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार अलग अलग वर्ण के हो सकते थे ...

भारतीय संस्कृति की विशेषताएं

भारतीय संस्कृति की विशेषताएं :- भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे अनुपम व अद्वितीय संस्कृति है जिसकी बराबरी दुनिया की कोई भी संस्कृति नहीं कर सकती है | भारतीय संस्कृति अपने आप में अनूठे विशेषताओं का संगम है जो उसे अन्य संस्कृतियों से अलग बनाती है | हममें से बहुत से लोग हैं जो भारतीय संस्कृति के बारे में जानना तो चाहते लेकिन इंटरनेट पर आसान भाषा में भारतीय संस्कृति के बारे में मिलना मुश्किल है इसीलिए भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आसान भाषा में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हूँ  | मुझे विश्वास  है आप सभी इसे पसंद करेंगे | 1~ सबसे पुरानी :- भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति है | मिश्र की संस्कृति संभवत: इसके आसपास की है पर आज मिश्र की संस्कृति सिर्फ नाममात्र की रह गयी है | इसके बाद बहुत सी संस्कृतियों ने जन्म लिया लेकिन वे समय के साथ कदम-ताल न कर पाने के कारण समाप्त हो गयीं |  आज के समय में भारतीय संस्कृति की तुलना सिर्फ और सिर्फ चीन से की जा सकती है और किसी से नहीं | 2~ अनवरत प्रवाहमान :-  भार...