उद्देश्य
आप सभी का Nvachar 'नवाचार' ब्लॉग में स्वागत है |
साथियों आप इस ब्लॉग पर आयें हैं तो संभवतः इसका यही मतलब है कि आप भारतीय संस्कृति और दर्शन से गहरे स्तर तक जुड़े हैं | आप भारतीय परंपरा, रीति-रिवाज, रहन-सहन और सबसे अहम भारतीयता को संपूर्णता से जानना व समझना चाहते हैं मगर आपको इस मामले में आधी-अधूरी जानकारी से ही संतोष करना पड़ता है | इसके कई कारण हो सकते हैं..
1- समयाभाव :-
तेजी से बदलते दुनिया में हर व्यक्ति के पास समय का कम होना कोई बड़ी बात नहीं है | हर इंसान अपनी रोजी रोटी की फिक्र में ही अपना सारा समय खफा देता है जिससे उसे अपनी संस्कृति, सभ्यता व दर्शन के बारे में पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता है |
2- सही जानकारी का न मिल पाना :-
आज इंटरनेट के दौर में कॉपी- पेस्ट करके बिना सच्चाई जाने खबरों को इधर-उधर बहुत से लोग फैलाते हैं | इससे पाठको को न तो पूरी जानकारी ही मिल पाती है और न ही सही | वह आधी-अधूरी जानकारी को ही पूरा सच मानकर आगे बढ़ता है |
3- किताबों का भारी-भरकम होना :-
आज तक भारतीय संस्कृति को व्याख्यायित करने वाले जितने भी ग्रन्थ लिखे गए हैं वे सभी काफी बड़े हैं चाहें वे वेद हों या फिर उपनिषद | इन्हें पढ़ने का बहुत ही कम लोगों के पास समय होता है यही वजह है कि हमारे अधिकतर साथी भारत में रहते हुए भी अपनी संस्कृति और सभ्यता से अन्जान रह जाते हैं |
यहां मैं आपको एक अच्छी खबर देने जा रहा हूँ कि अब घर बैठे हमारे ब्लॉग के माध्यम से भारत को बेहतर ढंग से जान व समझ सकेंगे | हम यहां पर न सिर्फ भारतीय संस्कृति, दर्शन व सभ्यता के बारे में बात करेंगे अपितु समय के साथ-साथ वह कैसे परिवर्तित होती गई और उसे प्रासंगिक बनाये रखने के लिए उसमें क्या-क्या नवाचार किए गए, आदि पर चर्चा करेंगे |
मुझे यह पूर्ण विश्वास है कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी से आप जरूर संतुष्ट होगें और भारतीयता को जानकर गौरवान्वित महसूस करेंगे | यह ब्लॉग आपमें जानकारियों की वृद्धि करने के साथ ही खुद को बेहतर ढंग से भी समझने में मदद करेगी |
इसी के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँ और कल से एक नए पोस्ट के साथ हाजिर होता हूं और इतने धैर्य के साथ मुझसे जुड़े रहने के लिए आपका बहुत- बहुत धन्यवाद करता हूँ |

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