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आत्मनिर्भर कैसे बने

आत्मनिर्भर कैसे बने :-

हम सभी लोग बचपन से ही सुनते आए हैं कि आत्मनिर्भर बनो, अपने पैरों पर खड़े हो आदि | लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर आत्मनिर्भर बला क्या है और आत्मनिर्भर कैसे बना जाता है ? नहीं ना |  चलिए आज हम आप सभी को बताते हैं कि आत्मनिर्भर होना किसे कहते हैं और आत्म निर्भर कैसे बना जाए | आत्मनिर्भर व्यक्ति में कौन कौन से गुण होते हैं.  |



आत्मनिर्भर कैसे बने



आत्मनिर्भर दो शब्दों से मिलकर बना है आत्म व निर्भर | आत्म का अर्थ होता है खुद या स्वयं और निर्भर का अर्थ होता है आश्रित होना | इस प्रकार आत्मनिर्भर का अर्थ हुआ खुद पर निर्भर होना | अर्थात किसी  भी काम के लिए , किसी और पर आश्रित ना होना ही आत्मनिर्भर कहलाता है |स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर का दूसरा नाम है |

आत्म निर्भर बनने के तरीके :-

आत्म निर्भर बनने के बहुत से तरीके हैं किन्तु हम यहां उन्ही तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं | ये तरीके निम्नवत् हैं -

1-सेल्फ एक्टिविटी :-

कोई भी काम खुद से करना ही सेल्फ एक्टिविटी कहलाता है | किसी भी व्यक्ति के लिए सेल्फ एक्टिविटी आत्मनिर्भर बनने की राह पर पहला कदम है | कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर तभी बन सकता है जब वह अपना हर जरूरी काम खुद से करना सीख जाए ताकि किसी अन्य पर आश्रित न रहे |
जैसे- भूख तो हम सभी को लगती है लेकिन यदि हमें खाना बनाना न आता हो तो हम अपने परिवार पर निर्भर रहेंगे कि वो बनाकर दें और यदि किसी विषम परिस्थिति में परिवार कहीं बाहर चला जाए तो आपके लिए भूखों मरने की नौबत आ जाएगी | यही वजह है कि हमें आत्म निर्भर बनना चाहिए |

2~ जिम्मेदारी उठाना :-

 आत्म निर्भर बनने की राह पर दूसरा कदम जिम्मेदारी उठाना है | जिम्मेदारी उठाने का अर्थ है -किसी भी काम को करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर लेना | जब से हम अपनी जिम्मेदारी खुद से उठाना शुरू कर देते हैं उसी दिन से आत्मनिर्भर बनने लगते हैं | जब भी कोई व्यक्ति कोई काम अपने उत्तरदायित्व के तहत करता है तो उसमें वह अपना 100% देते हैं | यही 100% देना ही हमें सफलता की तरफ तेजी से  ले जाता है |

3~ स्वतंत्रत बने :-

जब तक हम आत्म निर्भर नहीं बन जाते तब तक हम किसी न किसी रूप में किसी न किसी के गुलाम बने रहते हैं | क्यूँ कि हम अपने जरूरी कामों के लिए भी दूसरों के सहारे रहते हैं | सहारा देने वाला व्यक्ति अपने समय और मर्जी के अनुसार आपका काम करेगा | जबकि यदि उस काम को आप करना जानते तो दिन हो या रात, बिना किसी के सहारे के कर सकते | यही स्वतंत्रत होने का पहचान है | स्वतंत्रत व्यक्ति अपना कार्य तेजी से कर सकता है और उसकी सफलता के अवसर बढ़ जाते हैं | स्वतंत्रता ही आत्मनिर्भरता की कसौटी है |

4~ नवाचारी बने :-

प्रत्येक आत्मनिर्भर व्यक्ति नवाचार से भरे होते हैं और जो भी व्यक्ति नवाचारी होगा वह आत्मनिर्भर भी होगा | क्योंकि नवाचारी व्यक्ति आत्मनिर्भर बने रहने के लिए हमेशा अपडेट रहते हैं | नवाचारी होने का अर्थ है किसी कार्य को नए तरीके से करना | इसे एक उदाहरण से समझते हैं -
मान लीजिए कि आप प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं | और विषय तथा बच्चों पर पकड़ भी आपकी अच्छी है लेकिन यदि आप नवाचारी नहीं होगें तो बेहतर रूप से बच्चों को सिखा नहीं पाएंगे | आज का पूरा दौर कम्प्यूटर का है | प्रोजेक्टर के माध्यम से जब आप अपनी बात चित्र तथा रंगीन लिखावट के रूप में बच्चों को दिखाते हैं तो बच्चे जल्दी सीख जाते हैं और जीवन भर नहीं भूलेंगे | और यदि आप नवाचारी नहीं होंगे, खुद से कोई काम करके नहीं सीखेंगे तो आप कुछ भी हों,  कितने भी गुण आपमें हो लेकिन आप आत्मनिर्भर कभी नहीं बन सकते |

नवाचार को और भी अच्छे से समझने के लिए इस पोस्ट को पढ़े-
नवाचार : एक व्यापक दृष्टिकोण

5~ पैसे कमाना शुरू करें :-

पैसा कमाना भी आत्मनिर्भर बनने की राह पर एक कदम है | आप सर्वगुण सम्पन्न हैं लेकिन पैसों के लिए किसी और निर्भर हैं चाहे वह आपका परिवार ही क्यों न हो,  आप आत्मनिर्भर नहीं हो सकते |  जब आप अपने परिवार के पैसों पर निर्भर रहते हैं तो आपके पास अपनी मन मर्जी से पैसे खर्च करने का अधिकार नहीं होता | आपको एक-एक रूपये का हिसाब देना होगा | इसलिए यदि आपने आत्मनिर्भर बनने के लिए ठान ही लिया है तो आपको अपने खर्चे पूरे करने के लिए भी खुद पर ही निर्भर होना होगा | बिना आर्थिक स्वतंत्रता के आत्मनिर्भर नहीं बना जा सकता |

कोई भी व्यक्ति इन पांच गुणों को अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकता है | आत्मनिर्भर व्यक्ति बहुत जल्दी सफलता पा लेता है क्योंकि वह अपनी सफलता के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहता है | जबकि दूसरों पर निर्भर रहने वाला व्यक्ति या तो सफलता बहुत देर में पाता है या फिर पाता ही नहीं | क्योंकि उसकी सफलता भी दूसरों के द्वारा किए गए कार्य पर निर्भर रहती है |

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धन्यवाद |

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