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Showing posts with the label Personality Development

आत्मनिर्भर कैसे बने

आत्मनिर्भर कैसे बने :- हम सभी लोग बचपन से ही सुनते आए हैं कि आत्मनिर्भर बनो, अपने पैरों पर खड़े हो आदि | लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर आत्मनिर्भर बला क्या है और आत्मनिर्भर कैसे बना जाता है ? नहीं ना |  चलिए आज हम आप सभी को बताते हैं कि आत्मनिर्भर होना किसे कहते हैं और आत्म निर्भर कैसे बना जाए | आत्मनिर्भर व्यक्ति में कौन कौन से गुण होते हैं.  | आत्मनिर्भर कैसे बने आत्मनिर्भर दो शब्दों से मिलकर बना है आत्म व निर्भर | आत्म का अर्थ होता है खुद या स्वयं और निर्भर का अर्थ होता है आश्रित होना | इस प्रकार आत्मनिर्भर का अर्थ हुआ खुद पर निर्भर होना | अर्थात किसी  भी काम के लिए , किसी और पर आश्रित ना होना ही आत्मनिर्भर कहलाता है |स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर का दूसरा नाम है | आत्म निर्भर बनने के तरीके :- आत्म निर्भर बनने के बहुत से तरीके हैं किन्तु हम यहां उन्ही तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं | ये तरीके निम्नवत् हैं - 1-सेल्फ एक्टिविटी :- कोई भी काम खुद से करना ही सेल्फ एक्टिविटी कहलाता है | किसी भी व्यक्ति के लिए सेल्फ...

क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत

 क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत :- अक्सर यह सवाल हमारे मन में गाहे-ब-गाहे आता रहता है कि आखिर क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत ? यह सवाल अधिकतर उस समय हमारे सामने आता है जब किसी को हमारी बोली की वजह से खुशी मिलती है या फिर उसे चोट पहुंचती है | और फिर हम जवाब ढूंढ़ने में जुट जाते हैं | इसी सवाल का जवाब आज इस पोस्ट के माध्यम से दिया जा रहा है.. क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत मीठी बोली के विभिन्न क्षेत्र :- मीठी बोली हमें प्रेम करना सिखाती है, इंसान को इंसानियत का पाठ पढा़ती है | मीठी बोली दिल के गहरे घाव पर मरहम का लेप लगाती है और सुकून की अनुभूति कराती है | यह जीने के लिए सच्ची राह दिखाती है | आज कड़वाहट के इस युग में खासतौर पर युवाओं द्वारा बरते जाने वाले व्यवहार को सही दिशा देने हेतु मीठी बोली की सबसे ज्यादा जरूरत है | छोटी छोटी बात पर गुस्सा होना,  छोटे बड़े या बुजुर्ग का ख्याल किए बिना जो दिल में आए बक देना,  और आए दिन परिवार व रिश्तों के बीच पनप रहे खटाश को कम करने के लिए आज मीठी बोली की जरूरत सबसे ज्यादा है | बात बात में खून खराबे की ...

आखिर क्यों जरूरी है खुद की तलाश करना

आखिर क्यों जरूरी है खुद की तलाश करना : आखिर क्यों जरूरी है खुद की तलाश करना दुनिया संकट में है | कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को तबाह कर के रख दिया है ऊपर से लॉकडाउन का लम्बा वक्त | ऐसे संकट के दौर में क्या आपको नहीं लगता कि फिर से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ -साथ खुद के तलाश की आवश्यकता है? हर कोई हमसे कुछ नया करने के लिए कहता है | ऐसे में आपने कभी सोचा है कि अगर हम कुछ नया और साहसिक करने का जोखिम नहीं उठाते हैं तो क्या होगा ? जो भी हो पर ये  सच है कि हम सभी आपातकाल और आर्थिक मंदी के दौर में जी रहे हैं | जिसका असर व्यापक होगा | आज दुनिया का हर इंसान इस संकट से निकलने की जद्दोजहद में लगा हुआ है | इस स्थिति से निकलने के लिए आज सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है खुद की तलाश करना | जिसकी व्याख्या आगे की जा रही है... 1- अपने आपको पहचानो :- आज सबसे ज्यादा जरूरत खुद को पहचानने की है | कि आखिर हम हैं क्या ? संकट के इस दौर में हमारी स्थिति (औकात ) क्या है ? हम कितने पानी में हैं ? आदि | आज इन सवालों से डरकर भागने...

नवाचारी लोग कैसे सोचते हैं ? How think creative people ?

नवाचारी लोग कैसे सोचते  हैं  ? How think creative people ?  किसी भी का र्य को रचनात्मक ढंग से सोचना व करना नवाचार कहलाता है और इसे करने वाला नवाचारी होता है | अब हमारे मन मस्तिष्क में ये सवाल उठता है कि आखिर नवाचारी लोग सोचते कैसे हैं ? वे किस प्रकार से सोचते हैं कि वो सफलता का परचम लहरा रहे होते हैं,  उनकी रचनात्मकता का स्तर क्या होता है?  आदि | ऐसा क्या होता है उनके अंदर कि वे सफल और सफल होते चले जाते हैं जबकि आम इंसान सिर्फ मेहनत ही करता रह जाता है | आज हम इस लेख के माध्यम से इसी सवाल का जवाब जानने का प्रयास करेंगे... नवाचारी शख्शियत जिस ढंग से अपनी रचनात्मक को विकसित करती है और उसे अमल में लाकर अपने आप को बुलंदी के शिखर तक ले जाती है, उसका हू-ब-हू वर्णन आगे किया जा रहा है | मुझे यकीन है कि आप सभी को इसे पढ़कर रचनात्मक ढंग से सोचने में मस्त मिलेगी. | नवाचारी ढंग से सोचने के तरीके :-   सोचने का काम तो हम सभी करते हैं लेकिन मायने ये रखता है कि हम सोचते कैसे हैं यही हमारी सफलता और असफलता का निर्धारक होती है | एलन मस्क, बिल ग...

आलस्य दूर करने के अचूक उपाय

आलस्य दूर करने के 10 अचूक उपाय :- किसी भी मनुष्य को सफलता के शीर्ष पर पहुंचने या मंजिल की तरफ अपने कदम बढ़ाने में सबसे बड़े बाधक के रूप में जो पहला महत्वपूर्ण तत्व सामने आता है, वह है आलस्य | यही आलस्य हर असफलता का आधार है | आलस्य का मतलब हमारे मन व शरीर पर सुस्ती का हावी हो जाना है |  सुस्ती जिस हद तक हावी होती चली जाती है आलस्य उससे भी अधिक तेजी से अपना पैर जमाता चला जाता है जो हर प्रकार के रोग का जनक होता है | आलस्य के बारे में जानने के बाद हम सभी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह आलस्य होता क्यूँ है ? आलस्य के कारण क्या हैं ? आगे इसी सवाल का जवाब आगे दिया जा रहा है.-- आलस्य के कारण :- वैसे तो हमारे भीतर आलस्य पैदा होने के अनेको कारण हो सकते हैं लेकिन यहां सिर्फ मूल भूत कारणों पर चर्चा की जाएगी  जो निम्नवत हैं - 1- हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में नींद का ना मिल पाना |  2- अधिक भोजन करना भी आलस्य को जन्म देता है  3- भाग्यवादी नजरिया, आलस्य का ही रूप है | 4- व्यक्ति के जीवन में किसी लक्ष्य का न होना | 5- किसी कार्य को करने में ...

अभ्यास का महत्व

अभ्यास का महत्व :- किसी भी फील्ड में उन्नति के शिखर पर पहुंचने की चाहत रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति अभ्यास के महत्व से भलीभांति परिचित है | यह एक ऐसा हथियार है जो हमें युद्ध में विजय श्री तक ले जाता है  इसके बगैर सारे हथियार अशक्त हैं | व्यक्तित्व का विकास भी इस दायरे के बाहर नहीं है मैनें दुनिया में किसी भी फील्ड में सफल होने वाले महान व्यक्तियों  में  जो विशेषता सामान्य रूप से देखा, वह है अभ्यास का गुण | यही वह गुण है जो उन्हें आम से खास बनातें हैं और उनके सफलता की राह आसान कर देते हैं | तब यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए  बार-बार चीजों का अभ्यास करें | अभ्यास का महत्व  अभ्यास का अर्थ अभ्यास का अर्थ है किसी भी कार्य में पारंगत या निपुण होने के लिए उस कार्य को बार-बार करना, जब तक कि वह हमारे व्यक्तित्व का सहज अंग न हो जाए | अभ्यास ही वह कुंजी है जो बंद पड़े भाग्य के ताले को खालने का कार्य करती है | इसी तथ्य को विद्या अर्जन के सन्दर्भ में उपन्यासकार 'यशपाल' अपने प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास 'दिव्या' में प्रतिपादित करते ...

अच्छी आदतों का निर्माण

हमारा प्रत्येक कार्य, प्रत्येक अंग संचालन और प्रत्येक विचार हमारे चित्त पर एक नया संस्कार छोड़ जाते हैं जो लगातार अभ्यास से हमारी आदत बन जाते हैं | ये  दो प्रकार की होती हैं पहली अच्छी आदतें और दूसरी बुरी आदतें| हम आज इस लेख से यह जानेगें कि अपनी बुरी आदतों को अपने अवचेतन मन से बाहर निकालकर अच्छी आदतों को कैसे अपनाएं | हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्धारक हमारी आदतें होती हैं | हम किसी व्यक्ति के नजर में अच्छे हैं या बुरे यह हमारी आदतें ही तय करवाती हैं | अत: हमें अपनी आदतों का निर्माण सोच समझकर करना चाहिए | हमारी आदतें ही हमें सफल या असफल बनाती हैं  क्योंकि सफल व्यक्ति उस काम को करने की आदत बना लेते हैं जिस काम को करने में  असफल व्यक्ति हिम्मत हार बैठते हैं | जब सफलता और असफलता हमारे अपने हाथ में है तब क्यूँ ना हम सभी सफल हों और  सफल होने के लिए सबसे ज़रूरी चीज है कि हममें वे आदतें हों जो सफल व्यक्तियों में मूलत: पायी जाती है  | इसके लिए हमें सबसे पहले किसी शांत जगह पर बैठ जाना चाहिए और चित्त को एकाग्र करके अपने अंदर की उन आदतों की सूची बना लेनी चाहिए...