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क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत

 क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत :-


अक्सर यह सवाल हमारे मन में गाहे-ब-गाहे आता रहता है कि आखिर क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत ? यह सवाल अधिकतर उस समय हमारे सामने आता है जब किसी को हमारी बोली की वजह से खुशी मिलती है या फिर उसे चोट पहुंचती है | और फिर हम जवाब ढूंढ़ने में जुट जाते हैं | इसी सवाल का जवाब आज इस पोस्ट के माध्यम से दिया जा रहा है..



क्यों है जीवन में मीठी बोली की जरूरत

मीठी बोली के विभिन्न क्षेत्र :-

मीठी बोली हमें प्रेम करना सिखाती है, इंसान को इंसानियत का पाठ पढा़ती है | मीठी बोली दिल के गहरे घाव पर मरहम का लेप लगाती है और सुकून की अनुभूति कराती है | यह जीने के लिए सच्ची राह दिखाती है |

आज कड़वाहट के इस युग में खासतौर पर युवाओं द्वारा बरते जाने वाले व्यवहार को सही दिशा देने हेतु मीठी बोली की सबसे ज्यादा जरूरत है | छोटी छोटी बात पर गुस्सा होना,  छोटे बड़े या बुजुर्ग का ख्याल किए बिना जो दिल में आए बक देना,  और आए दिन परिवार व रिश्तों के बीच पनप रहे खटाश को कम करने के लिए आज मीठी बोली की जरूरत सबसे ज्यादा है | बात बात में खून खराबे की स्थिति ,  अशांति का वातावरण ,  कड़वाहट की वजह से सिर पर अनावश्यक बोझ को कम करने के लिए आज मीठी बोली की जरूरत सबसे ज्यादा है | संसार में सुख शांति स्थापित करने के लिए,  भाईचारा की स्थापना के लिए,  राम राज्य की कल्पना को साकार करने के लिए आज हम सभी की जुबान पर मीठी बोली का होना सबसे ज़रूरी है | इसके अलावा और भी बहुत सी चीजें है जो हमें बताती हैं कि हमारे जीवन में मीठी बोली की जरूरत क्यों है ?

हमारी बोली अनमोल है :-

गौरतलब है कि बोली भी हमारे व्यक्तित्व का अहम हिस्सा है | हमारी बोली हमारे चरित्र का आईना होती है | इसके द्वारा इंसान को बेहतर रूप में समझा जा सकता है कि वह व्यक्ति कैसा है और उसका नजरिया क्या है?  अत: मीठी बोली के इस प्रश्न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है तभी तो  कबीर जी ने भी बोली के महत्व को समझने के बाद कहा है कि

बोली एक अनमोल है जो कोऊ बोले जानि  

हिये तराजू तौलि के तब मुख बाहर आनि


अर्थात बोली एक अनमोल चीज है जिसका प्रयोग हर किसी को समझबूझ कर करना चाहिए | अपनी बोली को पहले तराजू पर तौलना चाहिए कि जिस जगह पर अपनी बात रखने जा रहे हैं, उसके लिए उपयुक्त है भी या नहीं,  यदि उपयुक्त हो तभी मुख से बाहर लाना चाहिए |

प्रकृति की सीख :-







प्रकृति भी हमें हर क्षेत्र के बारे में कुछ न कुछ जानकारी देती रहती है | अगर हम सीखना चाहें तो प्रकृति से बेहतर कोई शिक्षक नहीं है | जब प्रकृति शांत रहती है तो संसार के सभी प्राणी शांति पूर्वक जीवन यापन करते हैं | और यदि प्रकृति थोड़ी भी अशांत हुई या थोड़ा भी हलचल हुआ उसके अंदर तो सारे संसार में तबाही मत जाती है | यही हमारे जीवन के साथ होता है | कि यदि हम प्रकृति की तरह ही शांत चित्त होकर मीठी बोली का प्रयोग करते हैं तो हमारा जीवन शांत व सुचारु रूप से चलता रहता है यदि अशांत चित्त होकर कड़वी बोली का प्रयोग करते हैं तो हमारा जीवन अशांत और दुखों से भरा होगा |
इसीलिए तो कहा गया है कि शांत रहिए,  सुखी रहिए |
भगवान भी हमसे तो यही चाहते हैं तभी तो -

कुदरत को पसंद नहीं सख्ती जुबान में
इसीलिए तो दी नहीं हड्डी जुबान में


अगर कुदरत को हम सभी की जुबान पर सख्ती ही पसंद होती तो उनसे हम सभी की जीभ में हड्डी नहीं बनाई होती,  उसे इतना नरम क्यों बनाया होता |

जीवन में सफलता हेतु :-

इसके अलावा अपने जीवन में सफलता पाने के लिए भी मीठी बोली की जरूरत सबसे ज्यादा है |
क्यों कि वह हमारी बोली ही होती है जिसके नाते कभी हमें पान भी खाने को मिलता है तो कभी जूता लात भी खाने को मिलता है |
इसलिए हम सभी को हमेशा संयमित बोली का प्रयोग करना चाहिए | आज दुनिया में जितने लोग भी सफलता के शिखर पर पहुंचे हैं उसके पीछे उन सभी की मीठी बोली का ही हाथ है |
दिलों में जगह बनाने के लिए
दिलों में जगह बनाने के लिए और आपसी संबंधो में मधुरता लाने के लिए भी मीठी बोली ही सबसे कारगर उपाय है | अब्राहम लिंकन,  थियोडोर रुजबेल्ट,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदि ऐसे उदाहरण हैं जो  अपनी वाणी के दम पर हर दिल में जगह बनाए हुए हैं |




जीवन में सफलता हेतु :-

मान, सम्मान , प्रतिष्ठा सब के सब मीठी बोली की बदौलत ही मिलते हैं और फिर उसी की बदौलत कायम भी रहते हैं | मीठी बोली बोलने वाले की हर जगह सुनवाई होती है और मीठी बोली वाला व्यक्ति और लोगों की अपेक्षा जल्दी सफलता प्राप्त कर लेता है | दुनिया में दौलत शोहरत तो अनेको लोग कमाते हैं लेकिन लोगों के दिलों में घर सिर्फ मधुर बोलने वाले ही बना पाते हैं |
यही वजह है कि हमारे देश में संतो को ज्यादा महत्व दिया जाता है |

और अन्त में  :-

मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि अपने देश को बचाने के लिए,  अपनी आत्मा की रक्षा के लिए,  समाज में शांति के लिए,  वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को साकार करने के लिए हमें अपने जीवन में मीठी बोली को लाने सख्त ज़रूरत है |  यही हमारी पहचान भी है |

अगर लेख पसंद आए तो इसे अपने जीवन में अपनाइये साथ ही अपने स्वजनो को भी शेयर करना मत भूलिए  ताकि हरेक भाई बन्धु इसका लाभ उठा सकें और अपने जीवन में कलह से मुक्ति पाकर सफलता का परचम लहराये |

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