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मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव : फायदा या नुकसान

 मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव  : फायदा या नुकसान

कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती

जी हां कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती | और अगर मिल रही है तो उसकी कीमत बड़ी महंगी होती है | कभी-कभी तो इसकी कीमत अपनी स्वतंत्रता देकर चुकानी पड़ती है | अगर आप भी किसी भी प्रकार की मुफ्त की चीजों के आदी हो गए हैं तो सावधान हो जाइए.. क्यों कि इसका प्रभाव बहुत भयानक है | जो इंसान मुफ्त में कोई वस्तु लेता है तो वह देने वाले का एहसानमंद हो जाता है और एहसान के तले दबा व्यक्ति कभी भी निष्पक्ष व्यवहार नहीं कर सकता फिर चाहें देने वाला कितना ही अन्याय क्यों न करे | आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यह जानेंगें कि आखिर मुफ्त में मिली वस्तु हमारे अमूल्य जीवन पर क्या प्रभाव डाल रही है और इसके फायदे तथा नुकसान क्या हैं. ?



फायदा

मुफ्त में मिलने वाली वस्तु को तमाम अध्ययन और इतिहास खंगालने तथा व्यवहारिक अनुभव के आधार पर फायदे और नुकसान के आधार पर देखें तो इसका फायदा बहुत कम है या फिर यूं कहें कि न के बराबर है लेकिन नुकसान बहुत है | फायदा देखने पर सिर्फ एक ही चीज समझ में आती है कि बिना मेहनत किए हमारी उस वक़्त की आवश्यकता पूरी हो जाती है लेकिन यही फायदा हमारे लिए नुकसान भी है जिसे हम तीन भागों में  बांटकर देखेंगे 

नुकसान

1~ मुफ्त में मिली वस्तु मुफ्त में ही जाती है :-

जिस प्रकार पाप की कमाई पाप में जाती है ठीक उसी प्रकार मुफ्त में मिली वस्तु मुफ्त में ही जाती है | किसी भी मनुष्य को चाहें कितना भी कीमती वस्तु मुफ्त में दे दिया जाए तो वह इंसान उस वस्तु की कीमत नहीं समझता है | वह जिस प्रकार से पाया रहता है उसी प्रकार से गंवा देता है | 

उदाहरण के तौर पर 

मान लीजिए किसी व्यक्ति को एक लाख रुपये गिरे हुए मिल जाए तो वह व्यक्ति फूला नहीं समाएगा | वह सारा का सारा पैसा तुरंत खर्च करने की कोशिश करेगा | बेवजह की दारू पार्टी दोस्तों के साथ,  खरीददारी और भी तमाम तरह की फिजूलखर्ची के द्वारा सारा का सारा पैसा खत्म कर डालेगा |

लेकिन उस व्यक्ति ने वह पैसा अपनी मेहनत से कमाया होगा,  पसीना बहाकर कमाया होगा तो एक-एक पैसा बहुत समझदारी से खर्च करेगा | और अपनी बचत को बनाकर रखेगा | 


2~ अकर्मण्य बना देती है  :-

मुफ्त में खाने की आदत हमें अकर्मण्य बना देती है | अकर्मण्यता हमारे भीतर इस हद तक घर कर लेती है कि हमारा सर्वस्व लूट लेती है फिर भी हम उसकी दासता से मुक्त होने का प्रयास ही नहीं करते | अगर मुफ्तखोरी का यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हम फिर से गुलाम बन जाएंगे |

अगर जीवन में कुछ महान हासिल करना चाहते हो तो मुफ्त की आदत छोड़कर कर्मवीर बनों |

दुनिया में अगर मनुष्य को किसी वर्ग में विभाजित किया जा सकता है तो सिर्फ दो वर्ग में  - 

कर्मवीर व कर्महीन मनुष्य के रूप में |  

कर्मवीर वो जो जीवनभर संघर्ष करना स्वीकार कर लेंगे मगर मुफ्त की रोटी नहीं तोड़ेंगें | जबकि कर्महीन मनुष्य जीवन भर काम से जी चुराता है और हर वस्तु मुफ्त में पाने के लिए लालायित रहता है |

इस प्रकार जब भी हम कोई वस्तु मुफ्त में पाते हैं तो हमारे मन में यह भावना उभरने लगती है कि कितना अच्छा हुआ कि हमें मेहनत भी नहीं करनी पड़ी और हमारा काम भी हो गया | और दूसरी बार मुफ्त में पाने पर उसे विश्वास होने लगता है कि बिना मेहनत के भी आराम से जिंदगी काटी जा सकती है और फिर धीरे-धीरे उसका अवचेतन मन यह मान लेता है कि जब मुफ्त में कोई वस्तु मिल रही है तो उसके लिए हम काम क्यों करें और मुफ्त में खाने का वह पूर्णतः आदी हो जाता है | 

ऐसे ही उसका जीवन बीतता चला जाता है और वह अपनी स्वतंत्रता, संपत्ति, समय और यहां तक अस्तित्व को खोकर वह मुफ्त की चीजों के गुलाम हो जाता है | और फिर ऐसे इंसान को कोई भी उसकी आवश्यकता के बदले आसानी से गुलाम बना सकता है | जिस प्रकार शराबी को शराब देकर |

3~ हमारी स्वतंत्रता छीन लेती है :-

 फेसबुक,  वाट्सएप, ट्वीटर और भी न जाने कितनी ही सोशल मीडिया साइटें हैं जो हमें मिलती तो हैं मुफ्त लेकिन हमारी लेकिन हमारा निजी डाटा लेकर हमारी स्वतंत्रता छीन लेती है | आज हममें से लगभग प्रत्येक युवा इन सोशल साइटों का आदी हो गया है और अपना  अधिकतर समय यहीं पर बिताता है अपना जरूरी काम छोड़कर | दिल उम्र में उसे अपने स्किल को बढ़ाना चाहिए उस उम्र में वो अपना सारा समय सोशल साइटों पर बिता कर बर्बाद करते हैं | 


इन सबके अलावा हमारी मुफ्त में खाने की आदत का नुकसान हमें तथा हमारी आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है आज अगर हम कोई चीज मुफ्त में लेने की जगह हम पूर्णतः कमाकर खाने के आदी होते तो न तो मुफ्त में देने के लिए सरकार को तमाम योजनाएं चलानी पड़ती और न ही उसका राजकोषीय घाटा होता और न ही सरकार सभी सरकारी चीजों का प्राइवेटाइजेशन करती और न ही देश के युवाओं से उसका हक ( रोजगार ) छीना जाता | आज सरकार के पास देने के लिए न तो रोजगार है और न ही वेतन देने के लिए पैसे | और यह सब हमारी मुफ्तखोरी का ही नतीजा है जो हम सभी को भुगतना पड़ेगा |

चाहें सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुफ्त का राशन हो या मुफ्त का बिजली, पानी , चाहें मुफ्त की शिक्षा हो या फिर मुफ्त का आवास ; सब कुछ धीरे-धीरे हमें नष्ट कर रहा है | मुफ्तखोरी हमारे वास्तविक क्षमता के प्रदर्शन को रोक देती है जबकि हम बहुत कुछ कर सकते हैं | 

हमें कुछ भी मुफ्त में देने की जगह सरकार से रोजगार मांगनी चाहिए ताकि हम अपनी मेहनत का कमाकर खा सकें और अपना विकास कर सकें |

इसलिए दोस्तों आज से हम सभी यह संकल्प लें कि आज के बाद से न तो कोई वस्तु मुफ्त में लेगें (चाहें वह दहेज ही क्यों न हो ) और  न ही अपने आने वाली पीढियों  को लेने देंगे | 


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धन्यवाद 

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