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नवाचारी लोग कैसे सोचते हैं ? How think creative people ?

नवाचारी लोग कैसे सोचते हैं  ?

How think creative people ?

 किसी भी का
र्य को रचनात्मक ढंग से सोचना व करना नवाचार कहलाता है और इसे करने वाला नवाचारी होता है | अब हमारे मन मस्तिष्क में ये सवाल उठता है कि आखिर नवाचारी लोग सोचते कैसे हैं ? वे किस प्रकार से सोचते हैं कि वो सफलता का परचम लहरा रहे होते हैं,  उनकी रचनात्मकता का स्तर क्या होता है?  आदि |
ऐसा क्या होता है उनके अंदर कि वे सफल और सफल होते चले जाते हैं जबकि आम इंसान सिर्फ मेहनत ही करता रह जाता है |
आज हम इस लेख के माध्यम से इसी सवाल का जवाब जानने का प्रयास करेंगे...

नवाचारी शख्शियत जिस ढंग से अपनी रचनात्मक को विकसित करती है और उसे अमल में लाकर अपने आप को बुलंदी के शिखर तक ले जाती है,
उसका हू-ब-हू वर्णन आगे किया जा रहा है | मुझे यकीन है कि आप सभी को इसे पढ़कर रचनात्मक ढंग से सोचने में मस्त मिलेगी. |

नवाचारी ढंग से सोचने के तरीके :-




 




सोचने का काम तो हम सभी करते हैं लेकिन मायने ये रखता है कि हम सोचते कैसे हैं यही हमारी सफलता और असफलता का निर्धारक होती है |
एलन मस्क, बिल गेट्स आदि ऐसे तमाम नाम गिनाए जा सकते हैं जिनका नाम नवाचारी ढंग से सोचने में सबसे पहले आता है | ये ऐसे महानुभाव हैं जो अपनी रचनात्मकता के बल पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं |
आइये जानते हैं कि ये सभी के सोचने का तरीका कैसा होता है?

1- नजरिया.. Attitude
नजरिया या दृष्टिकोण किसी भी व्यक्ति के सोचने का प्रमुख रूप होता है | नजरिया के बारे में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विलियम जेम्स का कहना है कि

हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी खोज यह है कि "इंसान अपना नजरिया बदल कर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है |"

यही नजरिया ही हमें कामयाबी दिलाता है |
एक उदाहरण द्वारा इसे समझने का प्रयास करते हैं -
इस समय कोरोना वायरस की चपेट में सारी दुनिया के आ जाने से लॉकडाउन का सन्नाटा चारो ओर पसरा हुआ है | ऐसे में सामान्य इंसान लॉकडाउन में समय काटने का तरीका ढूंढ रहे हैं, उनका एक-एक पल बिताना मुश्किल हो रहा है और वहीं रचनात्मक लोग हर पल अपने आप पर काम कर रहे हैं ताकि लॉकडाउन खुलने के बाद अपने स्किल के गम पर अपनी पहचान बना सके और अलग मुकाम हासिल कर सके |
यही सामान्य व्यक्ति और नवाचारी व्यक्ति के बीच सोचने का अंतर है |

2- frist principal

हम सभी की जिंदगी समस्याओं से भरी है |
लेकिन हम उस समस्या से निजात पाने के लिए किस ढंग से  सोचते हैं वही हमें  Winner  या  Looser  बनाता है |
आइये इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं -
एलन मस्क का नाम किसी परिचय का मुहताज नहीं है | एलन मस्क 2000 में  मार्स पर अपना रॉकेट भेजना चाहते थे | लेकिन उनके रॉकेट खरीदने के पर्याप्त पैसे नहीं थे | फिर उन्होने रॉकेट के पार्ट का मूल्य बाजार में पता किया तो यह रॉकेट के कुल मूल्य का 2% ही था | एलन मस्क ने यहां पर ये सोचा कि क्यूँ न इसे खुद ही बनाया जाए  और इसके लिए दिन रात एक कर रॉकेट की जानकारी इक्ट्ठा की और नतीजा आज हमारे सामने है | चौथे प्रयास में वो सफल हुए|
यही  frist principal  होता है  सोचने का |

3- हमेशा नया रास्ता ढूंढना


नवाचारी लोगो की खासियत होती है कि वे हर कार्य को करने के लिए हमेशा नए नए रास्ते ढूंढते रहते हैं | वे बंधी बंधाई लीक पर चलने के साथ साथ कुछ न कुछ नया सोचते रहते हैं अपने काम को और भी आसान करने के लिए |

4- काम की गति Speed of Action 

सबसे महत्वपूर्ण चीज नवाचारी शख्शियत की किसी भी काम को करने की तीव्रता या गति होती है | नवाचारी व्यक्ति जो कुछ भी सोचता है और उसे लगता है कि यह सोच उसके प्रगति में सहायक होगी तो वह तुरंत उस सोच को अपने जीवन में उतारने के लिए तत्पर हो जाता है | जब तक वह उसे  अपना नहीं लेता, तब तक चैन की सांस नहीं लेता |


यही वो तरीके हैं जिस आधार पर नवाचारी या रचनात्मक शख्सियत सोचने का कार्य करता है |
मुझे विश्वास है कि आप सभी इनमें से कोई भी एक तरीके को हू-ब-हू अपने जीवन में उतारकर अपनी आदत बना लेता है तो मैं गारन्टी के साथ कह सकता हूँ कि कल का एलन मस्क आप होगें |

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